उत्तर प्रदेश: कांवड़ यात्रा पर टिप्पणी को लेकर शिक्षक के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज
सिर पर 10 लाख का इनाम… कौन है कपिल शर्मा के कैफे पर फायरिंग करने वाला हरजीत सिंह ‘लाडी’?
आपातकाल के पचास साल: रामनाथ गोयनका का संपादकों को पत्र
अगर रामनाथ गोयनका जीवित होते और आज के ‘अघोषित आपातकाल’ पर अख़बारों के मालिकों और संपादकों को पत्र लिखते, तो शायद यह दर्ज करते कि वह प्रेस जो स्वतंत्र होने की अनुमति का इंतज़ार करती है, उसने अपनी मर्ज़ी से आजीवन क़ैदी बनना चुना है. और वह संपादक जो
पत्रकारों को डेटा संरक्षण कानून से बाहर रखने की मांग, पीसीआई समेत 22 संस्थाओं ने सौंपा ज्ञापन
नई दिल्ली: प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (पीसीआई) और देशभर की 21 अन्य पत्रकार संगठनों ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपकर पत्रकारों के पेशेवर काम को डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) एक्ट, 2023 के दायरे से बाहर रखने का आग्रह किया है. प्रेस क्लब ने बुधवार (25 जून) को
मनरेगा की बदहाल स्थिति: केंद्र सरकार की नीति और रोज़गार के अधिकार पर हमला
पिछले दिनों मीडिया में छपी खबरों के अनुसार, सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत खर्च पर कुछ पाबंदियांं लगाई हैं. 10 जून को ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित खबर के अनुसार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली छमाही के लिए मनरेगा के
तंग आ चुके हैं…लिव इन रिलेशनशिप पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्यों की ये टिप्पणी?
इलाहाबाद हाईकोर्ट का लिव इन रिलेशनशिप को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है. हाईकोर्ट ने शादी का वादा कर महिला का यौन शोषण करने के आरोपी की जमानत मंजूर कर दी है. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप की अवधारणा भारतीय मध्यवर्गीय समाज में स्थापित मूल्यों
लाउडस्पीकर पर NCP-BJP में तकरार! अजित की अपील नहीं आई काम, सोमैया जारी रखेंगे अभियान
महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन की सरकार है. इस सरकार को बने हुए 6 महीनों से ज्यादा का समय हो चुका है. इस बीच अब खींचतान भी साफ तौर पर दिखने लगी है. एक तरफ जहां अजित पवार और एकनाथ शिंदे के नेताओं में नहीं बन रही है, तो वहीं
बिहार में बसपा की नई सियासी चाल: लव-कुश समीकरण साधने की कोशिश, सभी 243 सीटों पर उतारेगी उम्मीदवार
बिहार की राजनीति में लव-कुश यानी कुशवाहा- कुर्मी समीकरण हमेशा से सत्ता की चाबी रहा है। इसी समीकरण के सहारे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्षों तक खुद को सत्ता के केंद्र में बनाए रखा। अब इसी समीकरण को साधने के लिए बहुजन समाज पार्टी ने भी सियासी जमीन तैयार