September 3, 2026 1:56 am

[the_ad id="14531"]

छत्तीसगढ़ BJP में अंदरूनी कलह से बढ़ा संकट,26 वरिष्ठ नेताओं ने दिया इस्तीफ़ा ,भाजपा की कार्य प्रणाली से असंतुष्ठ

छत्तीसगढ़ BJP में अंदरूनी कलह से बढ़ा संकट,26 वरिष्ठ नेताओं ने दिया इस्तीफ़ा ,भाजपा की कार्य प्रणाली से असंतुष्ठ

रायपुर / छत्तीसगढ़ में इनदिनों भारतीय जनता पार्टी के कार्यशैलियों से असंतुष्ट होकर डोंगरगढ़ के वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने दिया सामूहिक स्थिपा , डोंगरगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर अंदरूनी कलह और संगठनात्मक असंतोष लगातार गहराता जा रहा है।

डोंगरगढ़ क्षेत्र में हाल ही में 111 कार्यकर्ताओं के सामूहिक इस्तीफा देकर हलचल मचा दिया है, कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी में केवल झंडा उठाने के अलावा उनका कोई कार्य नही है और ना हि कोई अहेमियत है, भारतीय जनता पार्टी अब पहले जैसा पार्टी नही रह गया है।

क्या मुख्यमंत्री जिम्मेदार है या वित्त मंत्री जिम्मेदार है बहुत गंभीर मामला है

111 कार्यकर्ताओं के बाद, अब पार्टी के 26 प्रमुख पदाधिकारियों और नेताओं ने भी प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इसे स्थानीय नेताओं द्वारा राज्य भाजपा के इतिहास का सबसे बड़ा सामूहिक इस्तीफा बताया जा रहा है।

इस्तीफा देने वाले प्रमुख चेहरे

सुमित मिश्रा – पूर्व भाजयुमो मंडल अध्यक्ष
एम. तुलसी– पूर्व महिला मोर्चा अध्यक्ष
बलविंदर सिंह भाटिया– जिला मंत्री, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा
अमित छाबड़ा – नगर पालिका पार्षद
अनिल पांडेय – वरिष्ठ जमीनी कार्यकर्ता

इस्तीफे की मुख्य वजहें: पार्टी में कार्यकर्ताओं का किया जा रहा है अनसुना, परिवारवाद और गुटबाजी भाजपा जिलाध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत को भेजे गए सामूहिक पत्र में नेताओं ने शहर मंडल अध्यक्ष जसमीत सिंह बन्नोतआना पर गंभीर आरोप लगाए हैं जैसे संगठन में निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर चुनिंदा लोगों के प्रभाव में फैसले लिए जा रहे हैं।वर्षों से पार्टी के लिए समर्पित भाव से काम कर रहे जमीनी कार्यकर्ताओं की लगातार अनदेखी की जा रही है।

राजनीतिक प्रभाव
111 कार्यकर्ताओं के बाद 26 बड़े पदाधिकारियों और पार्षद के इस्तीफे ने डोंगरगढ़ में भाजपा की गुटबाजी को उजागर कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि घोषणा पत्र में किये गये वादे, अनियमित एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमितीकरण नही करना, बिजली स्माड मिटर की मार येसे अनेक मुद्दे है जो लगातार कार्यकर्ताओं को सुनना पड़ रहा है, परिवार वाद हावि है, यदि प्रदेश संगठन ने जल्द हस्तक्षेप कर विवाद को शांत नहीं किया, तो आगामी चुनावों में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

Leave a Comment

[youtube-feed feed=1]
Advertisement
[the_ad_group id="33"]
[the_ad_group id="189"]