March 4, 2026 1:01 am

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योगी राज में चरम पर भ्रष्टाचार, IRS अधिकारी ने बनाई करोड़ों की संपत्ति

इनकम टैक्स विभाग में पूर्व अपर आयुक्त अमित निगम अब CBI के रडार पर हैं… गाजियाबाद स्थित CBI की विशेष अदालत ने आय से…

केंद्रीय जांच ब्यूरो ने आयकर विभाग के 1999 बैच के भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी…… और पूर्व अपर आयुक्त अमित निगम के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में बड़ी कार्रवाई की है…….. गाजियाबाद की विशेष CBI अदालत ने 2 जून 2025 को एक अड-इंटरिम आदेश जारी कर अमित निगम……. और उनके परिवार के नाम पर दर्ज 14 अचल संपत्तियों को अटैच करने का आदेश दिया है…….. जिनकी कुल कीमत 7.5 करोड़ रुपये से अधिक है……. ये संपत्तियां उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, लखनऊ, हरदोई, बाराबंकी और गोवा में फैली हुई हैं……. CBI की जांच में खुलासा हुआ है कि निगम ने अपनी वैध आय से छह गुना अधिक संपत्ति अर्जित की…….. जिसमें कई संपत्तियां बेनामी बताई जा रही हैं…….

आपको बता दें कि CBI ने 22 सितंबर 2022 को अमित निगम के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(2) read with 13(1)(e) के तहत आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था…….. वहीं जांच का नेतृत्व CBI के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस कमल प्रकाश शर्मा कर रहे हैं……… जांच का दायरा 1 जनवरी 2008 से 30 जून 2018 तक की अवधि तक सीमित है……… जब निगम आयकर विभाग में विभिन्न पदों जैसे डिप्टी कमिश्नर, जॉइंट कमिश्नर…… और अपर आयुक्त के रूप में दिल्ली, मुरादाबाद, लखनऊ, गाजियाबाद और अन्य स्थानों पर तैनात थे……

CBI के अनुसार इस अवधि में निगम की कुल वैध आय 1.26 करोड़ रुपये थी…….. जो मुख्य रूप से उनकी सैलरी से प्राप्त हुई……. हालांकि जांच में पाया गया कि उन्होंने और उनके परिवार ने 7.52 करोड़ रुपये की संपत्तियां अर्जित की……. जो उनकी ज्ञात आय से लगभग 600फीसदी से अधिक है…… इनमें से 14 अचल संपत्तियां जिनमें से कई बेनामी हैं…….. जो गाजियाबाद, लखनऊ, हरदोई, बाराबंकी और गोवा में स्थित हैं…….. इन संपत्तियों में फ्लैट, प्लॉट और अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं…….. जिनमें से छह संपत्तियां उनके परिवार और रिश्तेदारों के नाम पर दर्ज हैं………

CBI की जांच में यह भी सामने आया कि निगम ने अपनी आय को छिपाने……. और अवैध संपत्तियों को वैध दिखाने के लिए बेनामी लेनदेन का सहारा लिया……. बेनामी संपत्तियां ऐसी संपत्तियां होती हैं……. जो किसी और के नाम पर खरीदी जाती हैं……. ताकि वास्तविक मालिक की पहचान छिपाई जा सके…… वहीं इस मामले में निगम ने अपने परिवार……. और रिश्तेदारों के नाम पर संपत्तियां खरीदीं……… ताकि उनकी आय और संपत्ति के बीच के अंतर को छिपाया जा सके…….. CBI ने इन संपत्तियों को ट्रैक करने के लिए गहन जांच की……… जिसमें दस्तावेजों, बैंक खातों और संपत्ति रजिस्ट्रियों की गहन छानबीन शामिल थी…..

गाजियाबाद की विशेष CBI अदालत ने 2 जून 2025 को इन 14 संपत्तियों को अटैच करने का अड-इंटरिम आदेश जारी किया……. जिसका मतलब है कि इन संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है…….. और निगम या उनके परिवार के सदस्य इनका ट्रांसफर या बिक्री नहीं कर सकते……… यह आदेश CBI की जांच में मिले ठोस सबूतों के आधार पर जारी किया गया…… जो दर्शाता है कि निगम ने अपनी आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग कर भ्रष्ट तरीकों से धन अर्जित किया…….

अमित निगम 1999 बैच के IRS अधिकारी हैं…… और उन्होंने आयकर विभाग में लगभग दो दशकों तक विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया………. उनकी तैनाती दिल्ली, मुरादाबाद, लखनऊ, गाजियाबाद और अन्य शहरों में रही…….. जहां उन्होंने डिप्टी कमिश्नर, जॉइंट कमिश्नर और अपर आयुक्त जैसे पदों पर काम किया……… इन पदों पर रहते हुए……. उनके पास आयकर विभाग के कई महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी थी……. जिसमें कर निर्धारण, अपीलों की सुनवाई और कर चोरी की जांच शामिल थी…….

हालांकि CBI की जांच में यह आरोप है कि निगम ने इन पदों का दुरुपयोग कर……. अवैध रूप से संपत्ति अर्जित की…….. जांच में यह भी पाया गया कि उन्होंने अपनी आय को छिपाने के लिए जटिल वित्तीय लेनदेन किए…….. जिसमें बेनामी संपत्तियों का उपयोग…… और परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्ति खरीदना शामिल था…… CBI ने निगम के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(2) read with 13(1)(e) के तहत मामला दर्ज किया है…….. धारा 13(1)(e) किसी लोकसेवक द्वारा अपनी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने को आपराधिक कदाचार मानती है……. जबकि धारा 13(2) इस अपराध के लिए सजा का प्रावधान करती है…….. इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर सात साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है……..

बता दें कि CBI की जांच में यह भी सामने आया कि निगम ने अपनी आयकर विभाग की स्थिति का लाभ उठाकर कई अवैध गतिविधियों में हिस्सा लिया……. इनमें करदाताओं से अनुचित लाभ लेना……. और उनकी संपत्तियों को छिपाने के लिए जटिल वित्तीय नेटवर्क का उपयोग करना शामिल है……. जांच में शामिल DSP कमल प्रकाश शर्मा ने बताया कि इस मामले में और भी गहन जांच की जा रही है…….. ताकि निगम और उनके सहयोगियों के पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके…….

जैसे ही CBI ने निगम के खिलाफ मामला दर्ज किया…….. उन्हें आयकर विभाग से निलंबित कर दिया गया…….. यह निलंबन 22 सितंबर 2022 को हुआ…….. जब CBI ने उनके खिलाफ औपचारिक रूप से जांच शुरू की……. निलंबन के बाद CBI ने उनकी संपत्तियों, बैंक खातों और अन्य वित्तीय लेनदेन की गहन जांच की……… जिसके परिणामस्वरूप 14 अचल संपत्तियों की पहचान हुई……… इन संपत्तियों में से कुछ का मूल्यांकन कई करोड़ रुपये में किया गया है……. जो निगम की वैध आय से कहीं अधिक है…….

वहीं CBI ने इस मामले में निगम के परिवार और रिश्तेदारों की भूमिका की भी जांच की…….. क्योंकि कई संपत्तियां उनके नाम पर दर्ज हैं…….. जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या निगम ने अपने आधिकारिक पद का उपयोग कर करदाताओं से अनुचित लाभ लिया…… या किसी अन्य भ्रष्ट गतिविधि में शामिल थे…… आपको बता दें कि कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भ्रष्टाचार के खिलाफ CBI की कठोर कार्रवाई का उदाहरण है……. विशेषज्ञों का कहना है कि बेनामी संपत्तियों को ट्रैक करना…….. और उन्हें अटैच करना एक जटिल प्रक्रिया है…….. लेकिन CBI की इस कार्रवाई से भ्रष्ट अधिकारियों को सख्त संदेश मिलेगा……

बता दें कि CBI ने इस मामले में अपनी जांच को और गहरा करने का फैसला किया है……. जांच एजेंसी अब निगम के अन्य वित्तीय लेनदेन……. बैंक खातों और संभावित सहयोगियों की जांच कर रही है…….. यह भी देखा जा रहा है कि क्या निगम ने अपने पद का दुरुपयोग कर किसी विशेष करदाता या समूह को अनुचित लाभ पहुंचाया……. गाजियाबाद की विशेष CBI अदालत में इस मामले की अगली सुनवाई जल्द ही होने की उम्मीद है……. जिसमें निगम को अपने बचाव में जवाब देना होगा…….. यदि वे अपनी संपत्तियों के लिए वैध स्रोत साबित नहीं कर पाए……. तो इन संपत्तियों को स्थायी रूप से जब्त किया जा सकता है…….. और उनके खिलाफ आपराधिक सजा भी हो सकती है…….

आपको बता दें कि अमित निगम का मामला भारत में सरकारी अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार…… और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की समस्या को उजागर करता है……. CBI की इस कार्रवाई ने न केवल निगम की अवैध संपत्तियों को उजागर किया……… बल्कि यह भी दिखाया कि जांच एजेंसियां भ्रष्टाचार के खिलाफ कितनी गंभीर हैं……… यह मामला अन्य अधिकारियों के लिए एक चेतावनी है कि उनकी गतिविधियां निगरानी में हैं……. और भ्रष्टाचार के किसी भी प्रयास को बख्शा नहीं जाएगा…….

sanchar bharat
Author: sanchar bharat

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