-
- दिल्ली हाईकोर्ट ने कोविड-19 महामारी के दौरान तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल विदेशी नागरिकों को शरण देने के आरोप में दर्ज 16 मामलों में दायर आरोप पत्रों को रद्द कर दिया है. ये मामले 70 भारतीय नागरिकों के खिलाफ दर्ज किए गए थे.
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (17 जुलाई) को कोविड-19 महामारी के दौरान तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल विदेशी नागरिकों को शरण देने के आरोप में दर्ज 16 मामलों में दायर आरोपपत्रों को रद्द कर दिया है. ये मामले 70 भारतीय नागरिकों के खिलाफ दर्ज किए गए थे.
- बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने इन सभी मामलों में आरोपपत्रों को खारिज कर दिया है.
- जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने फैसला सुनाते हुए कहा, ‘आरोपपत्र रद्द किए जाते हैं.’
- हालांकि, विस्तृत फैसले का अभी इंतजार है.
मालूम हो कि दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कुल 16 एफआईआर दर्ज की थी. आरोपियों के खिलाफ उस समय लागू भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), महामारी रोग अधिनियम, आपदा प्रबंधन अधिनियम और विदेशियों अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. आरोप था कि इन लोगों ने विदेशी नागरिकों को अपने यहां ठहराकर देशव्यापी लॉकडाउन और अन्य आदेशों का उल्लंघन किया है.
गौरतलब है कि मार्च 2020 में दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज़ में आयोजित तबलीगी जमात के कार्यक्रम को कोविड-19 संक्रमण के कथित ‘सुपर स्प्रेडर’ के रूप में व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ा था. इसके चलते संगठन को सार्वजनिक रूप से बदनाम भी किया गया था.
पुलिस ने इस मामले में 195 विदेशी नागरिकों के नाम भी शामिल किए थे, लेकिन अधिकांश के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया. साथ ही ट्रायल कोर्ट ने भी डबल जियोपर्डी (एक ही अपराध के लिए दो बार सजा न देने के सिद्धांत) का हवाला देते हुए चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था.
आरोपियों ने साल 2021 में दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था और एफ़आईआर रद्द करने की मांग की थी. उनका तर्क था कि निषेध आदेश (prohibitory orders) केवल धार्मिक आयोजनों और भीड़ पर लागू था, न कि उनमें भाग लेने वाले विदेशी नागरिकों को ठहराने पर.
ज्ञात हो कि जनवरी 2022 में दिल्ली पुलिस ने इन याचिकाओं का विरोध किया था. पुलिस का कहना था कि आरोपियों ने दिल्ली सरकार के आदेशों का उल्लंघन किया था और कोरोना वायरस के प्रसार में योगदान दिया था.
लाइव लॉ के अनुसार, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील अशिमा मंडला ने कोर्ट में दलील दी कि मस्जिदों या घरों में मिले विदेशी नागरिकों को केवल आश्रय दिया गया था.
हाईकोर्ट ने पहले भी दिल्ली पुलिस से यह सवाल पूछा था कि लॉकडाउन अचानक लागू हो जाने के बाद वे लोग आखिर कहां जाते?
गौरतलब है कि तबलीगी जमात का यह कार्यक्रम मार्च 2020 की शुरुआत में दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज़ में हुआ था, जिसमें 9,000 से अधिक लोगों के शामिल होने की बात कही गई थी.
कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए राजधानी में 13 मार्च को सार्वजनिक आयोजनों पर पाबंदी लगाई गई थी.
[the_ad id="14531"]
लेटेस्ट न्यूज़
उत्तर प्रदेश: कांवड़ यात्रा पर टिप्पणी को लेकर शिक्षक के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज
July 16, 2025
1:06 pm
सिर पर 10 लाख का इनाम… कौन है कपिल शर्मा के कैफे पर फायरिंग करने वाला हरजीत सिंह ‘लाडी’?
July 11, 2025
10:48 am
[the_ad_group id="32"]
Advertisement
[the_ad_group id="33"]
[the_ad_group id="189"]





