July 28, 2026 8:20 am

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“जश्न में ज़हर: पटाखों ने दिल्ली की हवा को बना दिया गैस चेंबर”

  • दिल्ली में पटाखों से वायु प्रदूषण का कहर

नई दिल्ली — दिल्ली–एनसीआर में दिवाली की रात परम्परागत तरीकों से पटाखों के जलने के कारण वायु गुणवत्ता आज तक की सबसे चिंताजनक स्थिति में पहुँच गई है।

प्रमुख बिंदु

  • शहर में ‎Central Pollution Control Board (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिवाली के दिन PM₂․₅ (माइक्रोमीटर 2.5 माइक्रोन से छोटे कण) का स्तर 488 माइक्रोग्राम/घनमीटर तक पहुँच गया, जो पिछले पांच सालों में सर्वाधिक दर्ज किया गया है।
  • शाम से शुरू हुआ प्रदूषण व रात के समय चरम पर रहा — उदाहरण के लिए, रात 10 बजे तक PM₂․₅ का स्तर 537 माइक्रोग्राम/घनमीटर हो गया।
  • शहर के 38 मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 36 में वायु गुणवत्ता ‘रेड ज़ोन’ में पायी गयी।
  • शासन ने सिर्फ “ग्रीन पटाखों” के इस्तेमाल की अनुमति दी थी तथा रात 8 से 10 बजे तक पटाखों के प्रयोग तक ही सीमित किया गया था — लेकिन इन नियमों का व्यापक उल्लंघन हुआ।

जनजीवन पर असर

  • दिल्लीवासियों को सांस लेने में दिक्कत, आँखों में जलन, खाँसी और धुँधली दृष्टि जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है।
  • सुबह के समय धुंध इतनी घनी थी कि दृश्यता बहुत कम हो गई — सार्वजनिक परिवहन, सड़क सुरक्षा और स्कूल-कॉलेज संचालन प्रभावित हुए।
  • अस्पतालों में श्वसन संबंधी मरीजों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई गई है क्योंकि पीएम₂․₅ स्तर इतना ऊँचा हो गया था कि स्वास्थ्य-खतरा तुरंत सामने आ गया।

कारण एवं विश्लेषण

  • विशेषज्ञों का कहना है कि पटाखों का धुआँ एक प्रमुख कारण रहा, पर मौसम की स्थिति (ठंडी रात, कम वायु प्रवाह) ने इसे और बढ़ा दिया – ठंडी रातों में वायु स्थिर रहती है और प्रदूषण ऊपर से नीचे नहीं फैल पाता।
  • दिलचस्प बात यह है कि पराली जलाने (स्टबल बर्निंग) का योगदान इस वर्ष अपेक्षाकृत कम रहा — 0.8 प्रतिशत जैसा अनुमान लगाया गया है — फिर भी प्रदूषण इतनी तीव्रता से बढ़ा।
  • “ग्रीन पटाखे” के दावों के बावजूद वायु गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ — विशेषज्ञों ने कहा है कि इन पटाखों की गुणवत्ता-निगरानी व समय-सीमा का पालन नहीं हुआ।

क्या किया जा रहा है

  • शासन द्वारा ‎GRAP-2 (ग्रीन रिवायवल एक्टिविटी प्लान) जैसे नियम सक्रिय किये गए हैं — जैसे निर्माण कार्य पर रोक, वाहनों की संख्या सीमित करना इत्यादि।
  • प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रात 10 बजे के बाद पटाखों का प्रयोग ‘गैर जिम्मेदाराना’ है, और ऐसे व्यवहार से वायु प्रदूषण बढ़ता है।

दिवाली का पर्व, जहाँ खुशी-उत्सव का प्रतीक है, इस वर्ष दिल्ली के लिए वायु प्रदूषण के एक बड़े संकट में बदल गया है। पटाखों, मौसम-स्थितियों और नियमों के उल्लंघन का संयोजन वायु गुणवत्ता को ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी तक ले गया है। यदि समय पर कड़े कदम नहीं उठाये गए, तो आने वाले दिनों में स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं — विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन रोगियों के लिए।

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