धरमजयगढ़ वन मंडल में हो रहे है लगातार अतिक्रमण, भूमाफियाओं का बोल बाला वन मंडलाधिकारी बेजान बैठे
रायपुर / छत्तीसगढ़ वन विभाग के रायगढ़ जिला वन मंडल धरमजयगढ़ के नये नये कारनामें खुल खुलकर सामने आ रहे है, पूर्व में टीपी के माध्यम से लकड़ी चोरी, निविदा फार्म भरते रंगे हांथों पकड़े जाना, या चाहे मनरेगा में मरे हुए आदमी को जिंदा बताकर फर्जी हाजरी भरना ऐसे अनेको कारनामें है। धरमजयगढ़ वन मंडल के अंतर्गत अमलीटिकरा क्षेत्र में जंगल को खेत में बदलने का खेल खुलेआम चल रहा है। जेसीबी के द्वारा वन भूमि पर पेड़ों की अवैध कटाई बड़े पैमाने पर किया जा रहा है!लेकिन चिंता का विषय ये है की वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारी तो जानबूझकर आंख मूंदे बैठे हुए हैं। खुलेआम चल रहे है जेसीबी मशीन से जंगल उजाड़ा जा रहा है,जेसीबी जैसी बड़ी मशीन का जंगल तक पहुँचना, घंटों चलना भूमि समतल कर रहे है और फिर लौट जाना — यह सब बिना किसी सूचना के संभव नहीं है सबकी मिलीभगत जैसा प्रतित होता है।

सूचना देने पर जिम्मेदारी से पिछे हट रहे है अधिकारी कर्मचारी
स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों द्वारा जब इस गंभीर अवैध गतिविधि की सूचना संबंधित कर्मचारियों को दी गई, तो कार्रवाई के बजाय क्षेत्राधिकार का बहाना सामने आया। कोई बोरो रेंज का हवाला देता है, तो कोई धरमजयगढ़ रेंज का , तो कोई इसे अपने कार्यक्षेत्र से बाहर बताकर मामले से हाथ खड़े कर लेता है।
बड़े अधिकारियों तक पहुंची जानकारी, फिर भी सन्नाटा
सूत्र बताते हैं कि इस पूरे प्रकरण की जानकारी उच्च वन अधिकारियों को भी दी जा चुकी है, लेकिन अब तक न तो जेसीबी जब्त हुई, न ही अवैध कटाई करने वालों पर कोई ठोस कार्रवाई की गई। इससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या यह सब संरक्षण में हो रहा है? या फिर वन भूमि पर कब्जे को मूक स्वीकृति दी जा रही है?
वन कानूनों की खुलेआम अवहेलना
वन अधिनियम के अनुसार आरक्षित वन क्षेत्र में पेड़ काटना, भूमि समतलीकरण और खेती करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद जंगल काटे जाने का सिलसिला लगातार जारी है, मानो कानून यहां लागू ही न हो।
अब सवाल यह है कि ऐसे मामलों में
कब तक वन विभाग अनजान बना रहेगा? कब होगी दोषियों की पहचान और गिरफ्तारी? और क्या धरमजयगढ़ के जंगल प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ते रहेंगे?
यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में चांदीडांड– अमलीटिकरा क्षेत्र के जंगल केवल सरकारी कागज़ों में ही शेष रह जाएंगे।
वन मंडलाधिकारी धरमजयगढ़ के कार्यशैली पर प्रश्नचिन्हा खड़ा हो रहे है, अब देखना यह होगा कि क्या वनमंडलाधिकारी कार्यवाही कर पायेंगें या भूमाफियाओं, अपराधियों, दोषियों के आगे सरेंडर हो जायेंगें!





