मनेन्द्रगढ़ वन मंडल में तबादला से हड़कंप, बाबु से लेकर डेलिवेज कम्प्यूटर आपरेटर, कार्यालय सहायक करोड़ो का आसामी एन्टी करप्शन ब्यूरो से जांच कराने की मांग
रायपुर / छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश बार्डर लाईन पर बसे मनेन्द्रगढ़ , सोनहत,भरतपुर जहां वन विभाग की चर्चा कुछ वर्षों से लगातार सुर्खियों में है। मनेन्द्रगढ़ वन मण्डल इन दिनों सुर्खिया बटोर रहे है, लगातार भ्रष्टाचार के आरोप में घिरते रहे है मनेन्द्रगढ़ वन मंडल , दरअसल मनेन्द्रगढ़ का मामला ही कुछ अलग है, मूल छत्तीसगढ़यां कम और बाहरी लोग ज्यादा पदस्थ है जिसके कारण भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। और मनमानी के चलते कुछ दिन पूर्व जारी कार्य आबंटन और तबादला आदेश के बाद विभागीय हलचल तेज हो गई है!
इसकी चर्चा राजधानी रायपुर पहुंच गई, दिखावटी तबादला आदेश जारी कर कई कर्मचारियों को एक टेबल से दूसरे टेबल तक बदलाव तो कर दिया ! लेकिन कई वर्षों से मलाईदार पदों पर जमे कुछ प्रभावशाली बाबुओं को अब भी नहीं हटाया गया है, ये वही बाबु है जो पैठ जमाये हुए जो मूल रूप से बाहरी संकाय से ताल्लुक रखते हैं। मनेन्द्रगढ़ वन मंडल में है नियमित लिपिक की कमी, नियमित लिपिक तो भ्रष्टाचार को अंजाम दे हि रहे है,लेकिन उसके सांथ सांथ डेलिवेज के बाबु और कम्प्यूटर ऑपरेटर लिपिक से पिछे नही है बल्की उससे 10 कदम आगे है।

गुप्त सूत्रों से पता चला है कि उप वन मंडल कार्यालय जनकपुर कम्प्यूटर आपरेटर के पास 20-22 लाख के कार सहडोल में आलेसान बंगला, रेंज कार्यालय बैहरासी के कम्प्यूटर आपरेटर इनके पास भी मंहगी कार आलेसान घर है, रेंज कुंवारपुर में कार्यरत कार्यालय सहायक के पास भी आलेसान बंगला बनाया हुआ है, इन लोग रेंज कार्यालय से उप वन मंडल कार्यालय जैसे जगहो पर पदस्थ है! डेलिवेज कार्यालय सहायक, कम्प्युटर आपरेटर भी लंबे समय से एक ही जगहों पर काबिज रहकर लाखों करोड़ो रूपया के मालिक बन चुके हैं।
मनेन्द्रगढ़ वन मंडल में जनकपुर डिपो से दो सुरक्षा श्रमिकों को कार्य से पृथक कर दिया गया था जिसमें से बड़ी मुस्किल से दो श्रमिकों को कार्य रखा गया, लेकिन एक श्रमिक को अभी तक नही रखे हैं।

कुछ व्यथित रेगुलर लिपिकों का कहना है कि इन डेलिवेजों के पास बड़े बड़े मंहगी कार, ट्रक, जेसीबी, तथा आलिसान बंगला है, और हम जैसे लिपिक के पास कुछ भी नही है, दफ्तरी काम में जीवन बीत रहा है, ये जो कार्यालय सहायक व कम्प्युटर आपरेटर है बहुत ही शातिर व चालाक है, जो एसडीओ कार्यालय व रेंजर कार्यालय में अपनी धमक से काबिज किये हुए बैठे है। डेलिवेज का जब इतना बल्ले बल्ले है मनेन्द्रगढ़ वन मंडल में तो बाबु लोगों का पुछिये हि मत खास कर मनेन्द्रगढ़ वन मंडल के जनकपुर,कुवांरपुर, बैहरासी रेंज,एसडीओ कार्यालय में कम्प्युटर आपरेटर,कार्यालय सहायक बैठे है वो वीवीआईपी से कम नही है अधिकारी भी इनके आगे नतमस्तक है!
विभागीय ढांचा को लेकर विभागीय गलियारों में चर्चा है कि जिन शाखाओं में वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार अधिक हैं वहां लंबे समय से वही कर्मचारी काबिज हैं, जो पूर्व से ही पदस्थ है उसे हटाने का नाम नही लिया जा रहा है, हैरानी की बात यह है कि तबादला सूची में छोटे कर्मचारियों के नाम तो शामिल किए गये लेकिन उन बाबुओं का नाम सामिल ही नही है उनके तरफ तो देखा भी नही गया है, लंबे समय से विभाग में पकड़ मजबूत होने की बातें कही जाती रही हैं वह मामला ही कुछ और है।
सूत्रों का कहना है कि कुछ चुनिंदा बाबु लोगों को केवल औपचारिक रूप से सीट बदलकर कार्यवाही आईना दिखाने का प्रयास किया गया है, जबकि असली प्रभाव वाले पद अब भी पुराने चेहरों के पास ही बने हुए हैं उन खुर्शी में जमें हुए हैं।
विभाग के अंदर यह भी चर्चा है कि वर्षों से एक ही शाखा में जमे कर्मचारियों की पकड़ इतनी मजबूत हो चुकी है कि बिना उनकी सहमति के कोई फाइले आगे ही,नही जाता है।
कथित तौर पर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी आवाज उठ चुकी है। इसके बावजूद बड़े स्तर पर कोई ठोस कार्यवाही सामने नहीं आने से सवाल और गहरे होते जा रहे हैं। अब आम लोगों के बीच चर्चा इस बात की है कि क्या वन विभाग में तबादला केवल दिखावा बनकर रह गया है या फिर वास्तव में विभागीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिये कभी निष्पक्ष कार्यवाही भी होगी।
राजधानी रायपुर तक बातें निकलकर सामने आई है कि जनकपुर, बिहारपुर, बैहरासी, जैसे रेंज कार्यालय तथा उप वन मंडल कार्यालय में बैठे डेलिवेज कार्यालय सहायक, कम्प्युटर आपरेटर की संपत्ती की करोड़ो की है उनकी संपत्ति की जांच एन्टी करप्शन ब्यूरो से जांच कराया जाये ताकी भ्रष्टाचार के खजाना कहां कहां छुपा रखे है पता चल जायेगा।
इस मामले को लेकर जल्द ही एन्टी करप्शन ब्यूरों में शिकायत दर्ज कराया जायेगा।





