रायगढ़ में शराब ही शराब, तीन वर्षों में 100 करोड़ बढ़ गई कमाई, वित्त मंत्री के क्षेत्र में लोगों ने 36 महीनों में गटक ली 444 करोड़ की शराब वित्त मंत्री की विकास रथ दौड़ने लगी है..
रायपुर / छत्तीसगढ़ के समृद्ध जिला रायगढ़ में बहुत आश्चर्य की बात है कि विगत तीन वर्षों में रायगढ़ जिले में 100 करोड़ की शराब ज्यादा बिक गई। पिछली सरकार 2023 के अंत तक काबिज रही, तब की नीतियों के हिसाब से जितने शराब का बिक्री हुई थी, उससे 100 करोड़ ज्यादा की शराब इस साल बिक गई। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान प्रदेश में भ्रष्टाचार सबसे बड़ा मुद्दा बना था, इसमें भी शराब घोटाला अहम भूमिका रहा,तब शराब विक्रय के लिए नीतियां बनाई गई ।
शराब कंपनियों से एग्रीमेंट को लेकर अजीब निर्णय लिए गए थे,इसकी वजह से आय पर भी असर पड़ा।
वर्ष 22-23 में प्रदेश में 8838 करोड़ की शराब बेची गई थी जो 25-26 में बढक़र करीब 13 हजार करोड़ पहुंच गया है।
रायगढ़ जिला वित्त मंत्री के विधानसभा क्षेत्र है, ऐसा ही कुछ हाल रायगढ़ जिले में भी नजर आया है। वर्ष 22-23 की तुलना में इस वर्ष शराब की बिक्री में 100 करोड़ की बढ़ोतरी हो गई। तीन साल पहले रायगढ़ जिले में 344 करोड़ की शराब बिकी थी। वर्ष 25-26 में शराब बिक्री का आंकड़ा बढक़र 444 करोड़ पहुंच गया है, भाजपा की सरकार विकसित भार वर्ष 2047 की बाते करते हैं।
इसी आंकड़ा के आधार पर दमखम से वित्त मंत्री जी बाते करते है,बीते तीन वर्ष में 100 करोड़ रूपया पार हो चुका है तो वर्ष 2047 तक क्या हाल होगा।

महज तीन साल में ही 100 करोड़ का इजाफा कोई सामान्य बात नहीं है जबकि दुकानों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसका प्रमुख कारण ब्रांड की उपलब्धता और कीमत में वृद्धि है। बेची गई शराब की मात्रा में भले ज्यादा अंतर नहीं है, लेकिन कीमत बढऩे के कारण राजस्व बढ़ा। जहां एक ओर शराब बंदी की बाते होती है वही दुसरी ओर इसी के शासनकाल में शराब अधिक बिक्री हो रही है।
बढ़ी कीमतों ने बढ़ाई बिक्री
शराब की बिक्री से प्राप्त राशि 24-25 में कम हो गई थी। नीति को लेकर स्पष्टता नहीं थी। इसके बाद बड़े ब्रांड्स की उपलब्धता सुनिश्चित की गई और कीमतें भी बढ़ाई गई। इसी वजह से शराब बेचने से प्राप्त राशि अचानक से बढ़ गई। आबकारी विभाग के अधीन दुकानों में मैन पावर सप्लाई करने वाली कंपनी भी बदली गई है।
वर्ष विक्रय से प्राप्त राशि
22-23 344.83 करोड़
23-24 419.59 करोड़
24-25 375.56 करोड़
25-26 444.09 करोड़





