बलौदाबाजार वन मंडल के बारनवापारा अभ्यारण्य में बाघ का पुन: आगमन, क्षेत्रवासियों को सावधानियां बरतने की आवश्यकता
डी.सी.पटेल संवाददाता
रायपुर / छत्तीसगढ़ में बारनवापारा अभ्यारण्य को टाईगर रिजर्व बनाने की माग जोरो पर है,शासन की उदासिनता के कारण टाईगर रिजर्व नही बन पा रहा है लेकिन टाईगर / बाघ ने अपने रहवास क्षेत्र बनाने के लिए ठान लिया है उनके पुन: दस्तखत से हड़कम मच गया है।
दरअसल मामला यह है कि छत्तीसगढ़ शासन से बारनवापारा अभ्यारण्य को चाईगर रिजर्व घोषित किये जाने का प्लान बहुत पहले से हि चल रहा है। लेकिन अब तक टाईगर रिजर्व घोषित नही हो पाया है, लगभग विगत दो वर्षों से बारनवापारा अभ्यारण्य व महासमुंद वन मंडल के सिरपुर क्षेत्र के जंगलों में बाघ देखने के मिला था। महासमुंद वन मंडल और बलौदाबाजार वन मंडल दोनो के बॉर्डर लाईन व घनत्व जंगल है दो बारनवापारा अभ्यारण्य क्षेत्र से घिरा हुआ है!
वर्तमान में तेन्दुआ और हांथियों की भारी तादात में बसाहट बन चुका है, इसी बीच में बांघ ने भी बसाहट बनाने की मन बना लिया है येसा लगता है। महिनों दिन पहले कुछ ग्रामीणों ने भी देखने की बाते कही थी किन्तु हवाहवाई बाते है करके टाल दिया गया था!
लेकिन पुन: पग चिन्ह ने साबित कर दिया है कि बाघ वर्तमान में बारनवापारा अभयारण्य क्षेत्रों में विचरण कर रहे हैं। वन विभाग को अलर्ट हो जाना चाहिये सांथ में आस पास के गांवों में मुनादी भी कराया जाना चाहिए, ताकि समय रहते सावधानियां बरती जा सके।


बारनवापारा बाघ के रहने और बसाहट के लिए पूरी तरह लायक है – छत्तीसगढ़ वन विभाग ने तो इसे बाघ पुनर्वास के लिए सबसे उपयुक्त माना है।
बारनवापारा में बाघ क्यों लायक है –
1. ऐतिहासिक रूप से बाघों का घर रहा है –
40 साल पहले तक यहाँ अच्छी संख्या में बाघ थे, बाद में शिकार और मानवीय दबाव से विलुप्त हो गए। मार्च 2024 में 40 साल बाद एक 4 साल का जवान नर बाघ खुद चलकर यहाँ आया और 8 महीने तक रहा, इससे साबित हुआ कि जंगल ने बाघ को स्वीकार किया।
2. हेबिटेट और पानी पर्याप्त है –
– क्षेत्रफल – 244.66 वर्ग किमी, समतल + पठारी, सागौन, साल, बांस का घना जंगल
– 3 नदियाँ – बलमदेही नदी पश्चिमी सीमा, जोंक उत्तर-पूर्वी सीमा और महानदी, साथ ही पूरे अभ्यारण्य में कृत्रिम वाटरहोल बने हैं
– इसी कारण वन विभाग लिखता है – “The sanctuary’s ecosystem provides a suitable habitat for tigers, with an adequate prey base and sufficient water sources”
3. शिकार (Prey Base) भरपूर है –
चितल, सांभर, जंगली सूअर, चौसिंगा, भौंकने वाला हिरण, गौर, नीलगाय की अच्छी संख्या है। पन्ना टाइगर रिजर्व को 0 से 90 बाघों तक पहुंचाने वाले विशेषज्ञ आर. श्रीनिवास मूर्ति ने खुद जून 2024 में सर्वे कर कहा था कि यहाँ “ample prey base and water sources conducive to tiger survival” है।
4. सरकारी रिपोर्ट में सबसे उपयुक्त –
2024 की राज्य वन्यजीव बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार –
> “Among these reserves, Barnawapara Sanctuary is deemed the most suitable habitat for tiger relocation”
और 2025 की वर्तमान स्थिति में वन विभाग ने बारनवापारा में 2 बाघ होना माना है।
फिर भी स्थायी बसाहट में क्या अड़चन है?
1.आकार छोटा है – केवल 245 वर्ग किमी, एक बाघ को 20-30 वर्ग किमी चाहिए, इसलिए 4-5 से ज्यादा बाघ नहीं रह सकते।
2. कॉरिडोर – सीतानदी-उदंती और अचानकमार से जुड़ा नहीं है, अकेला पैच है।
3. मानव दबाव – चारों तरफ 32 गांव, मवेशी चराई, इसीलिए 2024 वाला बाघ कसडोल शहर में घुस गया था और उसे गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व में शिफ्ट करना पड़ा।
निष्कर्ष: बारनवापारा बाघ के लिए रहने लायक तो है ही, बल्कि यदि 2 मादा बाघ यहाँ लाकर छोड़ी जाएं (जिसका प्रस्ताव NTCA को भेजा गया था) तो यहाँ छोटा लेकिन स्थायी टाइगर पॉपुलेशन बस सकता है।





