पूर्व भानुप्रतापपुर वनमंडल में छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ का गठन, पदाधिकारियों का मनोनयन
रायपुर / छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ की कांकेर वृत्त स्तरीय महत्वपूर्ण बैठक आज पूर्व भानुप्रतापपुर वनमंडल के अंतागढ़ में संपन्न हुआ। बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष / प्रदेश उपाध्यक्ष श्री गिरधर जैन ने की, मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश अध्यक्ष श्री रामकुमार सिन्हा विशेष अतिथि प्रदेश महामंत्री श्री राजकुमार चौहान सामिल हुए!
बैठक में कांकेर वृत्त के अंतर्गत आने वाले नारायणपुर जिला, कांकेर जिला, पूर्व भानुप्रतापपुर, पश्चिम भानुप्रतापपुर एवं केशकाल, अंतागढ़, दुर्गुकोंदल, आमाबेड़ा, बांदे, कापसी, वन परिक्षेत्रों के सैकड़ों दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी उपस्थित रहे।
बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना एवं वर्षों से लंबित मांगों को लेकर आगामी रणनीति तय करना था।पूर्व भानुप्रतापपुर वन मंडल में पदाधिकारी यों का चयन किया जाना था सर्वसम्मति से पदाधिकारियों का पुन: मनोनयन –
बैठक में उपस्थित सभी कर्मचारियों की सर्वसम्मति से पूर्व भानुप्रतापपुर वनमंडगयई का गठन किया गया एवं निम्न पदाधिकारियों का मनोनयन किया गया –
अध्यक्ष – श्री चमरू राम गुरूवरगुरूवर
उपाध्यक्ष -श्री राजकुमार निषाद
उपाध्यक्ष -रामकृष्ण कुलदीप
सचिव – श्री दिनेश भास्कभास्कर
कोषाध्यक्ष – श्री पवन कुमार शर्मा
संगठन मंत्री -श्री ज्योति जैन
मीडिया प्रभारी – श्री रंजीत चक्रधारी
कार्यकारिणी सदस्य-
मस्सु आचला,संजीव कुमार कुंजाम, श्रीमती गैंदकुंवर पौषार्य, धरमु राम कुर्रा, मेहरू राम निषाद, रितेश खरे, कुमारी स्वेता पटेल, भानुप्रतापपुर वन परिक्षेत्र अध्यक्ष सांवत राम जोशी को मनोनयन किया गया।

नवनियुक्त सभी पदाधिकारियों को प्रदेश नेतृत्व द्वारा माला पहनाकर स्वागत किया गया एवं वन कर्मचारियों के हित में निष्ठा से कार्य करने की शपथ दिलाई गई।
नियमितीकरण, स्थायीकरण और वेतन विसंगति पर हुई गहन चर्चा –
1. नियमितीकरण – 10 वर्षों से वन विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को आज तक नियमित नहीं किया गया है। जबकि वन विभाग इन्हीं कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। जंगल की सुरक्षा, वन्य प्राणियों की सुरक्षा, आग बुझाने से लेकर बाघों की निगरानी तक, हर जोखिम भरा काम दैनिक वेतनभोगी ही करता है।
2.स्थायीकरण :- विगत 02 वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी एवं श्रमिकों को स्थायीकर्मी बनाकर उनका स्थायीकरण किया जाना चाहिये।
3.वन विभाग में कार्यभारित तथा आकस्मिकता निधि सेवा नियम जल्द से जल्द लागु किया जाये। वन मंत्री स्वयं अपने दिये गये आश्वासन पर खरा उतरते हुए वित्त विभाग से प्रस्ताव को जल्द पारित कराये!
4. वेतन विसंगति – वर्तमान में श्रमायुक्त दर पर मिल रहा वेतन, दैनिक वेतन वर्तमान के महंगाई थर्राई हुई है, इस परिस्थिति में परिवार चलाने के लिए दिक्कतों का सामना कर रहे है। कलेक्टर दर पर वेतन भुगतान और श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की गई।
5.अन्य मुद्दे – अनुकंपा नियुक्ति, बीमा सुरक्षा, वर्दी भत्ता एवं अवकाश की सुविधा पर भी प्रस्ताव पारित किया गया।
आंदोलन की चेतावनी –
संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि यदि सरकार ने आगामी 30 दिनों के भीतर हमारी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो पूरे प्रदेश में दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

बैठक के अंत में नवनियुक्त अध्यक्ष श्री चमरूराम गुरूवर ने सभी साथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि – “हमारा संगठन किसी के विरोध में नहीं, बल्कि अपने हक के लिए लड़ रहा है। हम जंगल बचाते हैं, तो सरकार को हमारा भविष्य बचाना होगा। बस्तर क्षेत्र से वन मंत्री जी है अगर बस्तर क्षेत्र के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की भविष्य की चिंता करती है तो दिसंबर माह शीतकालीन कालिन सत्र के विधानसभा में कार्यभारित आकस्मिकता निधि के पदों को वित्त विभाग से स्वीकृति कराते हुए बजट पास कराये!





