वन विभाग में शासन के आदेशों के अनुरूप स्थानान्तरण होना संभव है या नही यह तो अभी पता चलेगा , कि विभाग किस प्रकार स्थानान्तरण आदेश जारी करता है।
डी.सी.पटेल संवाददाता पिथौरा/ छत्तीसगढ़ सरकार ने कसावट लाने के उद्देश्य से स्थानान्तरण नीति पर ठोस कदम उठाते हुए 03 वर्षों से एक ही जगह पर पदस्थ अधिकारी कर्मचारियों का स्थानांतरण किये जाने संबंधित निर्देश जारी किये हैं।
उस निर्देश के परिपालन में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रशासन अराज ने जारी किया है पत्र जिसमें 10-10 कर्मचारी के मानक से स्थानांतरण किये जाने हेतु प्रतिवेदन चाहा गया है। भला कौन अधिकारी कर्मचारी चाहेगा कि वह स्थानान्तरण हो, नही चाहने के कारण ही तो 03 वर्षों से अधिक वर्षों तक एक ही जगह एक ही परिक्षेत्र एक ही वन मंडल में जमें हुए हैं।
वन विभाग में शासन के निर्देशों का होता है अवहेलना, अधिकारियों एवं कर्मचारियो की है बल्ले बल्ले छत्तीसगढ़ शासन की पारदर्शी नीतियों का एकाएक अवहेलना है। लिपीक कार्यालयों में लंबे समय से एक ही कार्यालय एक ही शाखा में जमें हुए है, अनुमान लगाया जा रहा है जिस खुर्शी पर बैठे है मलाईदार होने के वजह से खुर्शी छोड़ना नही चाह रहे हैं।
महासमुंद वन विभाग की हाल भी यही है
महासमुंद वन विभाग में भी लिपीकों की मनमानी देखने को मिला है, जो कि एक ही शाखा,एक ही कार्यालय में 05 -10 से 15 सालों पदस्थ है स्थानांतरण नीतियों को कोई प्रभाव ही नही पड़ रहा है। जिस हिसाब से अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने पत्र जारी किया है उस हिसाब से तो महासमुंद वन विभाग के लिपिकों की तो बल्ले बल्ले है, 10-10 कर्मचारियों का प्रतिवेदन लेना है जिसमें वन रक्षकों को बली का बकरा बना दिया जायेगा। महासमुंद वन मंडल कार्यालय,महासमुंद , बागबाहरा,पिथौरा,बसना, सरायपाली , काष्ठागार डिपो, वन विधालय में पदस्थ लिपीकों को एक जगह से दुसरे जगहों पर स्थानान्तरण किया जाना चाहिए।
अब देखना यह होगा कि महासमुंद जिला वन विभाग के अधिकारी क्या निर्णय लेता है, क्या स्थानांतरण नीतियों का पालन करेगा या नही !





