बारनवापारा परियोजना मंडल में सागौन तस्करों का आतंक, नावागांव बीट के कक्ष क्रमांक 833 में 10 एकड़ पर अतिक्रमण
क्षेत्र रक्षक और डिप्टी रेंजर फील्ड से गायब, निगम की उदासीनता से जंगल खतरे में
रायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम बारनवापारा परियोजना मंडल के अंतर्गत नावागांव बीट के कक्ष क्रमांक 833 में वन माफियाओं ने निगम के नियमों को ठेंगा दिखा दिया है। यहां कम से कम 10 एकड़ शासकीय बेशकीमती सागौन वन भूमि पर खुलेआम अतिक्रमण कर लिया गया है और हरे-भरे सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई की जा रही है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार अतिक्रमणकारियों ने पहले चरण में सागौन के पेड़ों को काटा, फिर उसी जमीन को समतल कर खेती योग्य बना लिया है। वर्तमान में उक्त कक्ष में अतिक्रमणकारी द्वारा ट्रैक्टर से जुताई कर कब्जा पक्का किया जा रहा है।
10 एकड़ पर कब्जा, पर देखने वाला कोई नहीं
सबसे बड़ा सवाल वन विकास निगम की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। जिस बीट में 10 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण हो गया, उस बीट का क्षेत्र रक्षक और डिप्टी रेंजर महीनों से फील्ड से गायब है। टीके लाल साहु लंबे समय से पदस्थ है प्रबंध संचालक से लेकर मंडल प्रबंधक इनके एहसान तले दबे हुए है जिसके कारण अनेको शिकायतें होने के बावजूद भी उन्हे इस रेंज से नही हटाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गश्त तो दूर, कभी-कभार अधिकारी कागजों में ही खानापूर्ति कर देते हैं।
नियमतः निगम के प्लांटेशन और सागौन वन क्षेत्र में प्रतिदिन गश्त अनिवार्य है, लेकिन नावागांव बीट में यह व्यवस्था पूरी तरह फेल है।

कागजों में सुरक्षित, मौके पर लुट रहा है जंगल
कक्ष क्र. 833 निगम का सबसे समृद्ध सागौन कक्ष माना जाता है। यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो अन्य कक्षों में भी अतिक्रमण की बाढ़ आ जाएगी।

ग्रामीणों और वन प्रेमियों ने प्रबंध संचालक, राज्य वन विकास निगम, रायपुर एवं वन मंडलाधिकारी, महासमुंद से मांग की है कि –
1. कक्ष क्रमांक 833 का सीमांकन कर जीपीएस / सैटेलाइट से 10 एकड़ अतिक्रमण का तत्काल बेदखली पंचनामा बनाया जाए।
2. नावागांव बीट के लापरवाह क्षेत्र रक्षक और डिप्टी रेंजर पर निलंबन की कार्रवाई की जाए।
3. काटे गए सागौन पेड़ों की गिनती कर एफआईआर दर्ज की जाए।





